Friday, 23 November 2012
Tuesday, 23 October 2012
32. इस हमाम में आकर सारे नंगे हीं क्यों हो जाते ?
बड़े - बड़े बड़बोलों के मुंह पर लटका है अब ताला
जबसे जनता की नजरों में आया उनका घोटाला,
इस हमाम में आकर सारे नंगे हीं क्यों हो जाते ?
मौलिक शोध करेगी इसपर कब यह कायर मधुशाला ?
Thursday, 27 September 2012
31. भगत सिंह जैसों की तो फांसी का फंदा थी दुल्हन
मांग रहे हैं पीनेवाले आज शहादत की हाला
साकी का असमंजस यह कि उसमें भी है घोटाला,
भगत सिंह जैसों की तो फांसी का फंदा थी दुल्हन
लेकिन काले-धन को दुल्हन मान रही अब मधुशाला.
............... सरोज कुमार
Wednesday, 26 September 2012
30. परत - दर - परत अब खुलता जाता री साकी सब घोटाला
परत - दर - परत अब खुलता जाता री साकी सब घोटाला
लेकिन वह बेशर्म चाल फिर चल देता कुत्तेवाला,
मुद्दे नए- नए ले आता, बहस नयी छिड़ जाती है
विस्मृति का अभिशाप युगों से ढोती है यह मधुशाला.
............... सरोज कुमार
29. किसका किसका चरण गहे यह पैरोडी कहनेवाला
किसका किसका चरण गहे यह पैरोडी कहनेवाला
मौलिकता का रोग लगा बैठा है हर पीनेवाला,
दुहराता इतिहास तो कविता नयी कहाँ से लाऊँ मैं,
जन्मा, जीया, मरा पुनः बस यही कथा है मधुशाला.
............... सरोज कुमार
Wednesday, 15 August 2012
28. हो कमजोर पकड़ प्याले पर उसको मत देना हाला
प्रधानमंत्री के द्वारा लालकिले से बिजली के सम्बन्ध में दिए गए आश्वासन के सन्दर्भ में-
********
हो कमजोर पकड़ प्याले पर उसको मत देना हाला,
कठपुतली का खेल यहाँ अब और नहीं चलने वाला,
भाषण में हीं बाँट रहा जो बिजली घर-घर रे साकी !
उसकी बातों में आएगी अब क्योंकर यह मधुशाला ?
27. समृद्धि का नया ब्रांड, यह साकी लेकर आयी है
योजना आयोग द्वारा गरीबी की परिभाषा गढ़ने के सन्दर्भ में -
छब्बीस रुपयों में बंट जाती गांवों में सस्ती हाला.
बत्तीस रुपयों में पा जाते शहरी जन भी, यह प्याला.
समृद्धि का नया ब्रांड, यह साकी लेकर आयी है,
मस्त रहें सब पीने वाले मस्त रहे यह मधुशाला.
............सरोज कुमार
Subscribe to:
Posts (Atom)