जिसने था अंगूर उगाया जिससे बनती है हाला
उसके कर में कहाँ किसी दिन देखा मैंने है प्याला
नीति-नियंताओं ने ऐसा जाल रचा है सुन साकी !
जिसका हक़ बनता है पहले, वह कब आता मधुशाला ?
16.
किसको-किसको समझाता कि मैं भी हूँ पीनेवाला
किसके-किसके पैरों पड़ता कि मैं भी हूँ मतवाला
पंक्ति में जो खड़े हुए थे धक्कम - धुक्का करते थे
दुर्बल जन के लिए बनी है कहाँ एक भी मधुशाला !
15.
साकी ! कहनेवालों ने तो कह दी थी महंगी हाला
लेकिन पीने को आया था वह भी निर्धन मतवाला
जिसके घर में पकी न खिचरी, बच्चे भी भूखे हीं थे
ऐसे भी हैं पीनेवाले, ऐसी भी है मधुशाला.
Thursday, 24 May 2012
14.
देख रही है तेल, तेल की धार यहाँ साकीबाला
घुंघट के पट के भीतर, पक रहा नया एक घोटाला. आम आदमी की सारी ऊर्जा अवशोषित कर लेती 'तेल - कमिटी' की गतिविधियाँ जान न पाती मधुशाला.
13.
कांग्रेसी संस्कृति से उपजी अकर्मण्यता की हाला पीकर स्वयं बहकती मुझको भी पकडाती है प्याला. "तेल - कमिटी" साकी बनकर मुद्दे को उलझाती है जबकि आशा-भरी निगाहें रखती उसपर मधुशाला.
12.
दो दिन बीते नहीं कि फिर से महंगी हाय हुई हाला इतना जुल्म कहाँ सह पायेगा कोई पीनेवाला, हाय लगे हम सबकी यारों इस बेगैरत साकी को इसके मुंह पर कालिख पोतेगी खुद हीं अब मधुशाला.
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हाला = पेट्रोल, साकी = सरकार, मधुशाला = ?
Monday, 21 May 2012
11.
मुझको क्यों ललकार रहे हो? खुलकर पीता हूँ हाला उसका भी तो रोग जान लो, दस जनपथ की जो खाला पुत्रमोह उसका किसके सिर पातक बन कर फूटेगा ? भ्रष्ट आचरण जिसका उसकी जय-जय करती मधुशाला.