Sunday, 18 August 2013
38. इतनी कडवी पिला रही है फिर भी है वह मधुबाला
इतनी मँहगाई है फिर भी हम पीते जाते हाला,
धंधे में हम हैं तो साकी टूट फूट तो होगी हीं,
Tuesday, 21 May 2013
37. कितनी आसानी से मुद्दे मोड़ रही है मुधुशाला
37.
साकी वे दिन कहाँ गए जब खाते थे कोयला काला ,
टू जी, थ्री जी, जीजाजी की हीं चर्चा थी धत साला।
अब तो बस श्री - संत महोत्सव हीं दिखलाई पड़ता है,
कितनी आसानी से मुद्दे मोड़ रही है मुधुशाला।।
Saturday, 9 February 2013
36. अब प्रगल्भ होती दिखती है मधुशाला की मधुबाला
अब प्रगल्भ होती दिखती है मधुशाला की मधुबाला,
बचपन इसने काट दिया है प्याले में भरते हाला।
सोंचा था जो कुछ पीना हो प्याले में रखकर पीऊँ,
लेकिन अब तो सीधे - सीधे मुंह में आती मधुशाला।।
बचपन इसने काट दिया है प्याले में भरते हाला।
सोंचा था जो कुछ पीना हो प्याले में रखकर पीऊँ,
लेकिन अब तो सीधे - सीधे मुंह में आती मधुशाला।।
Friday, 14 December 2012
35. साकी मेरे बिन मदिरालय का आँगन खाली - खाली
जिसने तुमको सौंपा साकी मधुघट, प्याला, मृदु - हाला,
उसने हीं सौंपी है मुझको चिरनवीन तृषा आला,
साकी मेरे बिन मदिरालय का आँगन खाली - खाली,
चाहे लाखों भीड़ जुटा ले झूठ - मूठ की मधुशाला।।
............... सरोज कुमार
उसने हीं सौंपी है मुझको चिरनवीन तृषा आला,
साकी मेरे बिन मदिरालय का आँगन खाली - खाली,
चाहे लाखों भीड़ जुटा ले झूठ - मूठ की मधुशाला।।
............... सरोज कुमार
34. आतुरता तासीर सुरा की
34.
माना मधुघट में हीं सागर भर लाई है मधुबाला,
माना प्याले में भर देगी वह फिर - फिर मादक हाला।
आतुरता तासीर सुरा की, तब कैसे थक जाऊँगा ?
मुत्यु - पार भी जाकर मुझको याद रहेगी मधुशाला।।
............ सरोज कुमार
माना मधुघट में हीं सागर भर लाई है मधुबाला,
माना प्याले में भर देगी वह फिर - फिर मादक हाला।
आतुरता तासीर सुरा की, तब कैसे थक जाऊँगा ?
मुत्यु - पार भी जाकर मुझको याद रहेगी मधुशाला।।
............ सरोज कुमार
Friday, 23 November 2012
33. मदिरा जो पी ली जाती है बिन मधुघट बिन प्याले की
नित-नित रूप बदलती साकी की सुन्दरता की हाला
प्याले की क्या रही जरूरत आँखों से ही पी डाला.
मदिरा जो पी ली जाती है बिन मधुघट बिन प्याले की
उसकी मादकता के आगे शीश झुकाती मधुशाला.
Tuesday, 23 October 2012
32. इस हमाम में आकर सारे नंगे हीं क्यों हो जाते ?
बड़े - बड़े बड़बोलों के मुंह पर लटका है अब ताला
जबसे जनता की नजरों में आया उनका घोटाला,
इस हमाम में आकर सारे नंगे हीं क्यों हो जाते ?
मौलिक शोध करेगी इसपर कब यह कायर मधुशाला ?
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